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क्यों खास है मानसरोवर झील

कहने को तो विज्ञान काफी तरक्की कर चूका है। पर कुछ स्थान ऐसे ऐसे ही भी जहाँ के रहस्यों का विज्ञान के पास कोई जवाब नहीं है। मानसरोवर झील के रहस्य भी उन्ही में से एक है। भोलेनाथ के निवास स्थल कैलास के पास स्थित मानसरोवर झील हिन्दू धरम में अपना अलग महत्व रखती है। मान्यता है की मानसरोवर स्नान के बाद इंसान जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो रूद्र लोक पहुँच सकता है।

यह झील प्राकृतिक है या मानवनिर्मित आज तक कोई नहीं जान पाया है। पुराणों के अनुसार इसकी उत्पति भगीरथ की तपस्या से खुश हो भगवान शिव ने की थी। अन्य मान्यतानुसार भगवान ब्रह्मा ने परमपिता परमेश्वर के आनंद अश्रुओं को कमंडल में रख उनसे धरती के ‘त्रियष्टकं’ (तिब्बत) जो की स्वर्ग समान भूमि थी वहां पर मानसरोवर झील की स्थापना की।शाक्त ग्रंथानुसार जब भगवान श्री कृष्ण का सुदर्शन चक्र देवी सती के पार्थिव शरीर को विभाजित कर रहा था तब उनके शरीर का डायन हाथ यहाँ गिरा था। इसलिए यह स्थान 51 शक्ति पीठों में से एक है। यहाँ एक पाषाण शिला को देवी सती का रूप मन उसकी पूजा की जाती है। मानसरोवर को ही क्षीर सागर भी माना जाता है जहाँ भगवान विष्णु, लक्ष्मी जी के साथ शेष नाग पर विश्राम करते हैं।

तिब्बत के 320 वर्ग किलोमाटर क्षेत्र में फैली मानसरोवर झील के उत्तर में कैलाश पर्वत तथा पश्चिम में राक्षसताल है। ‘मानसरोवर’ मानस तथा सरोवर दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ है मन का सरोवर। कैलाश मानसरोवर में आज भी कुछ ऐसे रहस्य बसे हैं जिनका विज्ञान के पास कोई जवाब नहीं है। रात्रि २:३० से ३:४५ तक यहाँ रहस्यमयी आवाजे सुनाई देती है। ध्यान से सुनने पर ये आवाजे डमरू या ॐ की ध्वनि के समान लगती है। वैज्ञानिक इन आवाजों की उतपति का कारण बर्फ का पिघलना बताते हैं। वहीँ श्रद्धालु गण इन्हे आलौकिक ताकतों द्वारा उत्पन्न ध्वनि मानते हैं। वजह चाहे जो भी हो पर मानसरोवर झील श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुभूति के साथ अचंभित होने पर भी मजबूर कर देती है।

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