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हिन्दू धर्म में महिलाओं के श्रृंगार का भी होता है खास महत्व

हिन्दू धर्म में महिलाओं के प्रत्येक श्रृंगार का एक ख़ास महत्व होता हैं. श्रृंगार सुहागन महिलाओं के सौभाग्य का प्रतीक माना जाता हैं. आज हम आपको हिन्दू मान्यताओं के अनुसार श्रृंगार का महत्व बताने जा रहें हैं.सिंदूर और बिंदी: हिन्दू धर्म में सुहागन महिला के माथे की कल्पना बिना सिंदूर और बिंदी के कभी नहीं की जा सकती. सिंदूर और बिंदी सुहागन होने का प्रतीक माना जाता हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार जो महिला अपने माथे के बीचों बीच सिंदूर लगाती है, उसके शरीर में विघुत ऊर्जा नियंत्रण में रहती है और महिला के धैर्य में वृद्धि होती हैं.

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मंगल सूत्र: सुहागन महिला का दूसरा सबसे बड़ा श्रृंगार होता है मंगल सूत्र. मंगल सूत्र काले मोतियों का बना होता और इसे पीले धागे में पिरोया जाता हैं. हिन्दू धर्म में पीला रंग बृहस्पति का प्रतीक माना गया हैं. मंगल सूत्र में सोने या फिर पीतल के लॉकेट का इस्तेमाल किया जाता हैं, मान्यता के अनुसार इससे महिला का स्वास्थ सही रहता है और काले मोती नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखते हैं. हालाँकि कुछ लोग मंगल सूत्र भी फ़ैशन के अनुसार पहनना पसंद करते हैं जबकि, शास्त्रों में बताया गया है की मंगल सूत्र का लॉकेट चौकोर होना चाहिए और इसे बार-बार उतारना नहीं चाहिए.चूड़ियां: शादीशुदा महिलाओं के चूड़ियां भी एक एहम श्रृंगार है, आपको बता दें की चूड़ियां पहनने से महिलाओं को कफ, वात और पित्त से बचाव होता. चूड़ियां काँच, सोने या फिर चांदी की भी हो सकती हैं. मंगलवार और शनिवार को चूड़ियां नहीं खरीदनी चाहिए और न ही किसी ऐसी महिला को तोहफे में देनी चाहिए जिससे आपके प्रेम सम्बन्ध न हों.

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पायल और बिछियां: कुछ महिलाएं सोने की पायल पहन लेती हैं, जबकि यह अशुभ होता हैं. पायल हमेशा चांदी की पहने इससे आपके शरीर में रक्त प्रवाह भी ठीक रहता है और चर्बी भी एक जगह इक्कठी नहीं होती. पायल में घुंघरू लगे हों तो कुंडली में बुध मजबूत होता हैं. बिछियों की बात करें तो यह शादीशुदा महिलाओं की भावनाएं संतुलित और नियंत्रित रखती हैं. अविवाहित महिला को कभी भी बिछियां नहीं पहननी चाहिए.
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