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गुर्जर आंदोलन : गहलोत सरकार को खुली चुनौती, प्रशासन हाई अलर्ट पर

गुर्जर आंदोलन : गहलोत सरकार को खुली चुनौती, प्रशासन हाई अलर्ट पर:

गुर्जर आरक्षण के मामले में इस बार गुर्जर समाज आर-पार के मूड में है. शुक्रवार को कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के बेटे विजय बैंसला ने दौसा के नेतृत्व में आज 17 अक्टूबर को भरतपुर जिले की बयाना तहसील में पीलूपुरा के पास गांव अड्डा में महापंचायत बुलाई गई है. उन्होंने कल दौसा में कहा था कि यदि गुर्जर समाज भारी संख्या में एकत्रित हो गया तो वो प्याज छीलने के लिए एकत्रित नहीं होगा. जिस कार्य में गुर्जर निपुर्ण है वह कार्य ही वहां पर करेगा. इस दौरान उन्होंने सरकार से भी कहा कि सरकार जिस कार्य को करने में निपुण है, वह कार्य करे और गुर्जरों की मांग मान ले. गुर्जर आरक्षण को लेकर शनिवार को भरतपुर के अड्डा में महापंचायत होगी. इसके लिए शुक्रवार को दौसा में गुर्जर समाज के नेताओं ने जगह-जगह जाकर पीले चावल वितरित किए और गुर्जर समाज के लोगों को अधिक से अधिक महापंचायत स्थल अड्डा में पहुंचने की अपील की.

महापंचायत पर क्या है कोर्ट का निर्देश ?

कोरोना संकट के इस दौर में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट और राजस्थान महामारी अध्यादेश, 2020 के तहत जारी बाध्यकारी निर्देशों के तहत 100 से ज्यादा लोगों की कोई सभा नहीं हो सकती. राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार किसी भी स्थान पर महापंचायत, सार्वजनिक सभा के शांतिपूर्ण, हथियाररहित आयोजन के लिए संबंधित जिला कलेक्टर को आवेदन प्रस्तुत करना होगा. हाईकोर्ट ने ये भी कहा है कि कर्नल बैंसला को ये अंडरटेकिंग भी देनी होगी कि वे रास्ता रोकने जैसा कृत्य नहीं करेंगे.

संबंधित जिला कलेक्टर इन सार्वजनिक सभाओं, महापंचायतों की अनुमति देने से पूर्व यह देखेंगे कि इन आयोजनों से अन्य नागरिकों या वर्गों के मौलिक और विधिक अधिकारों उल्लघंन तो नहीं हुआ है. राज्य सरकार आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों को संरक्षित रखने सार्वजनिक और निजी संपति के नुकसान को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध करेगी. साथ ही राज्य सरकार गुर्जर समुदाय के दबाव में आकर गुर्जर जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार को कोई संस्तुति पत्र नही देगी.

समिति ने नहीं किया है निर्देर्शो का पालन

अभी तक की जानकारी के अनुसार गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के द्वारा आयोजित होने वाली पंचायत के लिए भरतपुर कलेक्टर को किसी भी प्रकार की अंडरटेकिंग नही दी गई है.ऐसे में हाईकोर्ट और महामारी अधिनियम की धज्जियां उडने पर कोर्ट र्कारवाई के साथ साथ जुर्माना भी लगा सकता है क्योंकि कोरोना गाइडलाइंस को लेकर हाईकोर्ट के निर्देश के तहत संघर्ष समिति द्धारा जिला कलेक्टर को अंडरटेकिंग देने पर ही महापंचायत हो सकेगी.

कर्नल बैंसला की अध्यक्षता में होगी बैठक

गुर्जर समाज के नेताओं का कहना है कि सरकार ने अभी तक एमबीसी वर्ग को 5% आरक्षण का लाभ नहीं दिया है और पुरानी भर्तियों का बैकलॉग नहीं भरा जा रहा है. साथ ही इस आरक्षण को 9वीं अनुसूची में भी नहीं डाला गया है. दरअसल, बीते 14 साल से राजस्थान में गुर्जर आरक्षण को लेकर आंदोलनरत हैं. छह बार बड़े स्तर पर आंदोलन कर चुके हैं, जिसमें अब तक 72 लोग मारे जा चुके हैं. अभी भी गुर्जरों के मुताबिक उनकी मांग पूरी नहीं हुई है. ऐसे में अब वर्ष 2020 में गुर्जर सातवीं आंदोलन की राह पर हैं. गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के बेटे विजय बैंसला भी गुर्जर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार समय रहते जाग जाए तो अच्छा है अन्यथा गुर्जर समुदाय सरकार को जगाना जानता है. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 के फरवरी में गुर्जर आंदोलन के बाद राजस्थान सरकार ने उनकी मांगों को लेकर जो समझौता किया, वो अभी तक लागू नहीं किया है. गुर्जर नेताओं ने अपने समाज के विधायकों से भी आह्वान किया है कि सभी विधायक 17 अक्टूबर को पीलूपुरा के पास अड्डा गांव में होने वाली गुर्जर महापंचायत में भाग लें अन्यथा समाज उनको भी सबक सिखाने का काम करेगा.

प्रशासन हाई अलर्ट पर

आपको बता दें कि आंदोलन की आशंका के चलते पुलिस और प्रशासन भी सतर्क हैं. मिली जानकारी के अनुसार बीते बुधवार पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र मकसूदनपुरा पहुंचे थे, जहां उन्होंने गुर्जर नेताओं से कोरोना महामारी का हवाला देते हुए वार्ता के जरिए ही हल निकालने को लेकर आग्रह भी किया है. भरतपुर जिला कलेक्टर नथमल डिडेल व जिला पुलिस अधीक्षक अमनदीप सिंह कपूर ने इलाके का दौरा कर जायजा लिया है और मौके पर भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.

अब सरकार भी हुई है सक्रिय

एक ओर जहां गुर्जर समाज ने महापंचायत का ऐलान कर दिया है, वहीं अब राज्य सरकार भी गुर्जर आंदोलन की सुगबुगाहट को देखते हुए इस मामले में सक्रियता दिखा रही है. इसके लिए सचिवालय में गुर्जर आरक्षण के क्रियान्वयन के लिए पुनर्गठित कैबिनेट सब कमेटी की बैठक हुई, जिसमें गुर्जर समाज को एमबीसी वर्ग को नौकरियों में आरक्षण का लाभ देने की थी मांग को लेकर मंथन किया गया. कमेटी के अध्यक्ष और ऊर्जा मंत्री बी. डी कल्ला ने कहा कि करीब 50 प्रतिशत विभागों ने एमबीसी आरक्षण से जुड़ी वर्गीकृत सूचनाएं नहीं दीं है, वहीं कुछ भर्तियों पर विधिक राय ली जा रही हैं. बीडी कल्ला ने कहा कि कोई भी फैसला हो, और विधिक तौर पर दिक्कत न हो, इसलिए गुर्जर प्रतिनिधिमंडल से जल्द वार्ता की जाएगी. इधर खबरों की मानें तो, इस मामले को लेकर खेल मंत्री अशोक चांदना लगातार कर्नल किरोड़ी बैसला से संपर्क बनाए हुए हैं.

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