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अभद्र भाषा का समर्थन कर रही सत्ताधारी पार्टी: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रोहिंटन नरीमन

भाजपा पर ‘हेट स्पीच’ को बढ़ावा देने का आरोप रिटायर्ड जस्टिस रोहिंग्टन फली नरीमन ने लगाया है | उनका यह दवा है की देश में ‘हेट-स्पीच’ की घटनाओ की वृद्धि हो रही है और अल्पसंख्यकों के नरसंहार के लिए भी उकसाया जा रहा है | वे मान रहे है की ये दुर्भाग्य है की इस तरह की घटनाओ का साथ देने या बढ़ावा देने या ऐसी चीज़ो पर चुप्पी रहने के आरोप में सत्तादारी पार्टी को दोषी ठहराया है | उन्होंने कहा है की कॉमेडियनों पर और तो और छात्रों पर भी देश द्रोहों के मामले दर्ज किये जा रहे है |

justice nariman on hate speech

१४ जनवरी २०२१ शुक्रवार को मुंबई में उन्होंने ‘ डीएम हरीश स्कूल ऑफ़ लॉ’ में एक कार्यक्रम में कानून के शासन के संवैधनिक आधार (CONSTITUTIONAL UNDERPINNINGS OF THE RULE OF LAW ) पर बात करते हुए ये सब बाते कही थी| उनका यह आरोप था की देश के युवाओ को देश द्रोही के आरोपों में गिरफ्तार किये जा रहा है | अंग्रेजी के ज़माने के कानून का हिस्सा बताते हुए उन्होंने ये कहा है की इन सब चीज़ो की अब ज़रूरत नहीं है | उन्होंने यह भी कहा है की जो लोग नरसंहार जैसी चीज़ो के बारे में बात करके उन चीज़ो पर बयान दे रहे है उन पर कोई भी करवाई क्यों नहीं करते |

अभद्र भाषा का समर्थन कर रही सत्ताधारी पार्टी: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रोहिंटन नरीमन

दिव्या कुमार सोती जो की सुरक्षा के मामलो के जानकर है, इन्होने ऊपर दिए गए बयान में ट्विटर पर ट्वीट करते हुए ये कहा है की ” क्या वो असदुद्दीन ओवैसी या फिर मौलाना तौकीर रजा की बात कर रहे है? उन्होंने ये कहा है की मौलाना तौकीर रजा ने देश का नक्शा बदलने के उद्देश्य से ये बात कही थी की हिन्दुओ को भागने के लिए यह किसीको पनाह नहीं मिलेगी| हलके ओवैसी ब्रोठेर्स हिन्दुओ के खिलाफ घृणा भरे भड़काऊ भाषण देते रहने के मामलो में कुख्यात है| अकबर को मुग़लो की खयालो पर पट्टी जताते हुए सेक्युलर करार दिया है जस्टिस रोहिंग्टन फली नरीमन ने|

हम आपको ये बता देना चाहते है की सबरीमाला मंदिर में महिलाओ को मंदिर के अंदर प्रवेश करने की अनुमति से सम्बंधित जजमेंट सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट के पीठ में वो भी शामिल ही थे| जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने भारत को अब विविध सांस्कृत्यो का देश कहा है और उन्होंने इस विषय पर भी आपत्ति जताई है की सबरीमाला मंदिर में सर्वोच्च न्यायलय के आदेश दिए जाने पर भी महिलाओ को उस मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है |

उनका यह मानना है की फ्रेस स्पीच को जब तक अनुमति होने चाहिए जब तक उससे किसी हिंसा की बात न फैले। उनके इस बयान की वजह से वो आलोचना के शिकार भी हो चुके है|

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