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क्या फिर से भारत में लग सकता है लॉकडाउन ?

हाल ही में दुनिया भर के कई सारे देशों में दोबारा लॉकडाउन लगाया गया है, जबकि कुछ देशों में लगाने की तैयारी की जा रही है. पूरे यूरोप में कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के लिए यूरोपीय देशों की सरकारें नई पाबंदियाँ लागू कर रही हैं. हाल ही में कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण (बुधवार को कोरोना के 22,951 नए मामले सामने आए) फ़्रांस के 9 शहरों में नाईट कर्फ़्यू लगाया गया है. फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि देश में कोरोना के बढ़ते मामलों पर क़ाबू पाने के लिए राजधानी पेरिस समेत नौ शहरों में लोगों को रात नौ बजे से सुबह छह बजे तक कर्फ्यू रहेगा, जो चार हप्तों तक जारी रहेगा और फिर उसके बाद सरकार इसे छह हफ़्तों तक बढ़ाने की कोशिश करेगी.

फ़्रांस के अलावा नीदरलैंड्स में भी स्थानीय समयानुसार रात के दस बजे से आंशिक लॉकडाउन लागू कर दिया गया है, जबकि बुधवार को स्पेन के उत्तर-पूर्वी राज्य कैटालोनिया ने भी कहा कि गुरुवार से बार और रेस्त्रां को अगले 15 दिनों के लिए बंद किया जा रहा है. इसके अलावा चेक गणराज्य में भी स्कूलों और बार को बंद कर दिया गया है. पिछले दो हफ़्तों में यूरोप में सबसे ज़्यादा कोरोना संक्रमण के मामले यहीं देखे गए हैं, जो एक लाख आबादी पर 581.3 हैं.

पूरे यूरोप में कोरोना संक्रमण की दर में इज़ाफ़ा हो रहा है. रूस में बुधवार को 14,321 नए मामले सामने आए और 239 लोगों की मौत हुई. ब्रिटेन में भी पिछले कुछ घंटों के दौरान कोरोना वायरस के हजारों नए मामलों की पुष्टि के बाद कोरोना संक्रमितों की संख्या 6 लाख को पार कर 6 लाख के पार पहुंच गई, जिसके बाद देश में दूसरे राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की संभावना बढ़ गई है.

इंग्लैंड के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी जोनाथन वान-टैम ने भी चेतावनी देते हुए कहा है कि ब्रिटेन कोरोना महामारी से एक बार फिर जूझने की गंभीर स्थिति में पहुंच गया है, जैसी कि महामारी के शुरुआत के समय थी। देश के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच कोरोना प्रतिबंधों की एक नई तीन-स्तरीय प्रणाली की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं ताकि कोरोना की रफ्तार को एक बार फिर धीमा किया जा सके.

इसराइल ने देशभर में दोबारा लॉकडाउन की घोषणा की. इसराइल में दूसरा लॉकडाउन शुक्रवार से शुरू होगा और तीन हफ़्तों तक चलेगा. प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि इस कदम की “हमें भारी क़ीमत चुकानी होगी”, लेकिन इसराइल में अब रोज़ाना संक्रमण के 4,000 मामले सामने आ रहे हैं. दूसरे लॉकडाउन से इसराइल की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा, जो पहले से ही महामारी की वजह से मंदी झेल रही है. वित्त मंत्रालय ने अनुमान लगाया है कि इससे 1.88 अरब डॉलर का नुक़सान होगा,
लेकिन प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का कहना है कि हमें ये करना होगा, क्योंकि ये फैसला महामारी के इस दौर में इसराइल के लिए ज़रूरी है.

भारत के आंकड़े क्या बोलते हैं ?

भारत में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 71 लाख के पार हो गया है लेकिन 17 सितंबर (97 हजार) के बाद से इसमें निरंतर गिरावट देखी जा रही है. एक्टिव मामलों की संख्या रोजाना घट रही है. राहत की सबसे बड़ी बात ये है कि ये कमी महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे उन राज्यों में सबसे अधिक देखी जा रही है, जहाँ सबसे अधिक मामलें मिले हैं. हालाँकि इंदौर जैसे कुछ शहरों में हालात काफी बुरे हैं लेकिन दिल्ली जैसे बड़े शहरों का अभी तक शानदार प्रदर्शन रहा है.

इन सारे आंकड़ों पर गौर करने के बाद भी हम यह दावे के साथ नहीं कह सकते कि भारत में दोबारा लॉकडाउन लगाने कि जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि लॉकडाउन लगाने का निर्णय इस पर निर्भर करेगा कि कोरोना संक्रंमण का पीक फिर से शुरू हुआ है या नहीं. यदि भारत में फिर से कोरोना के मामलों ने रफ्तार पकड़ी तो लॉक डाउन लगाना एक बार फिर से जरूरी हो जायेगा लेकिन फिलहाल के आंकड़े दोबारा लॉकडाउन की ओर इशारा नहीं कर कर रहे हैं. हाँ इतना जरूर है उन शहरों में दोबारा लॉकडाउन लगाने कि जरूरत एक बार फिर से पड़ जाय,जहां हाल के दिनों में निरंतर मामलों में वृद्धि देखी जा रही है.

विशेषज्ञों का मानना है कि देश में कोरोना से मृत्यु दर कमहै लेकिन यूपी, बिहार, झारखंड को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है. दक्षिण के कई राज्यों में भी पीक आकर चला गया है, अब उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड को उनसे सबक लेने की जरूरत है. फिलहाल सभी को एहतियात बरतनी है, ताकि पीक आने या संक्रमण बढ़ने पर सुरक्षित रहें.

कोरोना के हर रोज बढ़ते केस और रिकवरी रेट पर स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि जनसंख्या के लिहाज से भारत की स्थिति अभी बिगड़ी नहीं है, क्योंकि सबसे अहम मृत्यु दर है, जो भारत में दूसरे देशों की तुलना में काफी कम है. सबसे अच्छी बात ये है कि जितना वायरस के बारे में डॉक्टर और हेल्थ डिपार्टमेंट जान रहा है, उसे देखते हुए कहीं न कहीं लोगों में भी जागरूकता आई है. लोग समझ रहे हैं कि संक्रमण होने पर कैसे रिएक्ट करें. किस स्तर पर परेशानी होने पर अस्पताल जाना है, यह लोग जानने लगे हैं और अस्पताल के चक्कर नहीं काट रहे हैं.

WHO प्रमुख टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसस का कहना है हम सिर्फ वैक्सीन के इंतजार में नहीं बैठ सकते. हमारे हाथ में फिलहाल जो भी साधन है, उससे लोगों की जिंदगी बचाने की कोशिश करनी चाहिए. कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया की स्वास्थ्य प्रणालियों, समाज और अर्थव्यवस्थाओं को उलझा दिया है. हर जगह इसके मामले बढ़ रहे हैं और सभी देशों को सतर्क रहना चाहिए. वायरस अभी भी हमारे आसपास है और लोगों पर खतरा बना हुआ है. WHO प्रमुख ने देशों से चार प्रमुख चीजों पर ध्यान देने को कहा है. भीड़ को रोकने, बीमार लोगों का ख्याल रखने, सुरक्षा और सतर्कता के मानकों का पालन करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने को कहा है. गेब्रियेसस ने कहा, ‘जो देश ये इन चार चीजों को अच्छी तरह करते हैं, वो अपने देश में कोरोना को फैलने से और दोबारा लॉकडाउन लगाने से बच सकते हैं.

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