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MP – मसूद पर हाई कोर्ट ने फटकारा, कहा- सूर्य उपासना विशुद्ध योग

आरिफ मसूद जो मध्य प्रदेश के भोपाल से कांग्रेस विधायक है | इन्होने १ जनवरी से ७ फरवरी तक जो भी सरकारी शिक्षण संस्थानों में आयोजित होने वाले सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का विरोध किया है | इस कार्यक्रम को आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है | आरिफ मसूद ने इस कार्यक्रम का विरोध करते हुए मध्य प्रदेश के हाई कोर्ट में याचिका दायर किया है |

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१ फरवरी २०२२ को हाई कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई दी है | इस सुनवाई में हाई कोर्ट ने सुनवाई में आरिफ मसूद की इस याचिका पर ये कहा, ” सूर्य नमस्कार विशुद्ध रूप से योग है , इसमें कही भी धार्मिक उपासना नहीं है | सूर्य नमस्कार वस्तुतः स्वास्थ्य और जीवन की जरुरुआत है | ” कुएरत ने मासोद को इसके सात सात उनके इस तर्क को भी ख़ारिज कर दिया की इसकी वजह से उनकी धार्मिक भावनाये ठेस पहुँचती है | मसूद ने अपने दिए हुए याचिका में ये भी कहा था की, ” सूर्य नमस्कार को सूर्य पूजा माना जाता है | और सूरज की पूजा करना इस्लाम के खिलाफ है | संविधान हमें शिक्षण संस्थानों में किसी विशेष धर्म की शिक्षा या किसी विशेष समूह की मान्यताओं के आधार पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं देती है |”

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की इस याचिका पर 8 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

रवि मालिमठ जो की हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस है और जस्टिस पीके कौरब की डिवीज़न बेंच ने मसूद की इस याचिका पर सुनवाई दी और इस सुनवाई में उनलोगो ने ये कहा की ऐसा कहा लिखा है की सूर्य नमस्कार करने के लिए कोई किसी को भी जबरदस्ती  कर रहा है | अगर ऐसा कही लिखा गया है थो दिखाईये | कुछ दस्तावेज पेश करने के कारन याचिकाकर्ता ने सूरत से समय की अनुमति मांगी है | ८ फरवरी २०२२ को इस मामले पर सुनवाई होगी | हम आपको ये भी जानकारी देना चाहेंगे की १ से ७ फरवरी के बिच कही पाठशालाओं में सूर्य नमस्कार के फैसल का विरोध AIMPLB  ( आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ) ने भी किया था |

बोर्ड ने मोदी सर्कार के इस फैसले का विरोध करते हुए ये कहा था की, ” इस्लाम सूर्य नमस्कार की इज़ाज़त नहीं देती, क्युईकी ये सूर्य पूजा का रूप है | ” मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी जो AIMPLB के महासचिव है, इन्होने इस मामले में अपना बयां दिया था जिसमे ये कहा था की, ” भारत एक धर्मनिरपेक्ष, बहु धार्मिक और बहु सांस्कृतिक देश है | और हमारा संविधान इन्ही सिद्धांतो पर लिखा गया है | पाठशालाओं की पाठ्क्रमों को भी इन सब चीज़ो का ध्यान रखकर बनाया गया है पैर यह दुर्भाग्यपूर्ण है की वर्तमान सरकार इस सिद्धांत से भटक रही है|”

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