Breaking News
Home / खबरे / पूरी मुंबई में बत्ती गुल क्यों और कैसे ?

पूरी मुंबई में बत्ती गुल क्यों और कैसे ?

पूरी मुंबई में बत्ती गुल क्यों और कैसे ? पावर ग्रिड फेल ?

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई सोमवार सुबह बिजली गुल होने से थम गई है. मुंबई की लाइफलाइन कही जानी वाले लोकल ट्रेनें भी जहां-तहां थम गईं है, जिससे लाखों लोग बीच सफर में फंस गए. महाराष्ट्र सरकार के मंत्रालय, कई दफ्तरों, अस्पतालों में बिजली जाने से संकट पैदा हो गया, इसके साथ ही ट्रैफिक सिग्नल भी बंद हो गए. जानकारी के मुताबिक सुबह करीब 10 बजकर 15 मिनट पर ग्रिड फेल होने के कारण यह संकट पैदा हुआ. बताया जा रहा है कि साउथ, सेंट्रल और नॉर्थ मुंबई में कहीं भी बिजली नहीं आ रही है, यहां तक कि ठाणे और नवी मुंबई तक में इसका असर देखा जा रहा है.

power grid failure in mumbai

पावर ग्रिड फेल होने की वजह से वेस्टर्न लाइन की रेलवे भी प्रभावित हुई है. खास तौर पर चर्चगेट से वसई तक ट्रेन सेवा बंद है लेकिन वसई-विरार इलाके में बिजली की सुविधा होने की वजह से वसई से बोरीवली के बीच में कुछ ट्रेनें चलाई जा रही है. पावर कट के बीच मुंबई एयरपोर्ट पर संचालन ठीक तरीके से हो रहा है. वहीं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में भी काम चल रहा है. जानकारी के मुताबिक 380 मेगावट की पावर बाधित हुई है। बिजली पूरी तरह बहाल होने में 2 घंटे से ज्यादा वक्त लग सकता है। फ़िलहाल कोविड अस्पतालों में फिलहाल पावर बैकअप के जरिये बिजली आ रही है लेकिन शहर में कब तक बिजली आएगी, इसके बारे में अभी कुछ निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता. बृहनमुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाइ ऐंड ट्रांसपोर्ट (BEST) ने ट्वीट कर कहा है, ‘टाटा इनकमिंग बिजली की आपूर्ति करने वाले प्लांट से ग्रिड फेल हो गई है, जिससे इलेक्ट्रिक आपूर्ति बाधित होने से शहर को बिजली नहीं मिल पा रही है. असुविधा के लिए खेद है।

इस मामले पर अडानी इलेक्ट्रिसिटी ने भी ट्वीट कर बताया है कि, ‘पावर ग्रिड फेल होने के कारण मुंबई के अधिकतर इलाकों में विद्युत आपूर्ति बाधित है। ग्रिड सेफ्टी प्रोटोकॉल के तहत, अडानी पावर सिस्टम एईएमएल दहानू जेनरेशन के जरिए मुंबई में आपातकालीन सेवाओं के लिए 385 मेगावाट तक बिजली आपूर्ति दे रहा है. हमारी टीम प्रभावित इलाकों में जल्द से जल्द बिजली बहाल करने के लिए काम कर रही है. असुविधा के लिए खेद है.

जहां-तहां खड़ी है मुंबई लोकल

ग्रिड फेल होने का असर मुंबई लोकल पर भी पड़ा है. जहां-तहां लोकल खड़ी है. इस वजह से लोग लोकल को छोड़कर पैदल ही अपने गंतव्य की ओर निकल चुके हैं. रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (सीपीआरओ) ने कहा कि ग्रिड फेल होने के कारण मुंबई लोकल ट्रेन की सेवा बाधित हुई है. बिजली की आपूर्ति शुरू होने के बाद लोकल की सेवा फिर से शुरू हो जाएगी.

कैसे फेल होता है पावर ग्रिड, जिससे ठप हो जाती है बिजली की सप्लाई

ग्रिड बिजली लाइनों का एक नेटवर्क होता है, जिसके जरिए उपभोक्ता तक बिजली की सप्लाई की जाती है. यानी बिजली उत्पादन से लेकर बिजली आपके घर या दफ्तर पहुंचाने तक जिस नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है उसे पावर ग्रिड कहा जाता है. पावर ग्रिड के तीन स्टेज होते हैं.

  • पावर जनरेशन
  • पावर ट्रांसमिशन
  • पावर डिस्ट्रीब्यूशन

पहले चरण में बिजली का उत्पादन किया जाता है. ये किसी पानी वाली जगह पर होता है. नदियों पर बांध बनाकर आम तौर पर भारत में बिजली बनाई जाती है. बिजली निर्माण के बाद उसकी सप्लाई उन राज्यों या इलाकों में की जाती है, जिनसे इसके लिए करार होता है. इस बिजली सप्लाई को पॉवर ट्रांसमिशन कहा जाता है. इसके बाद संबंधित पॉवर स्टेशनों से बिजली ग्राहकों तक सप्लाई की जाती है, जिसे पावर डिस्ट्रीब्यूशन कहा जाता है.

इन तीन चरणों में बिजली सप्लाई के लिए लाइनों के जिस नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है उसे ही पावर ग्रिड कहा जाता है. भारत में कुल पांच पॉवर ग्रिड हैं.

  • नॉर्थर्न ग्रिड- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़
  • ईस्टर्न ग्रिड- पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा, सिक्किम
  • नॉर्थ-ईस्टर्न ग्रिड- अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा
  • वेस्टर्न ग्रिड- महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा
  • साउथर्न ग्रिड- तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पुड्डुचेरी

कैसे फेल होता है पावर ग्रिड

भारत में बिजली का ट्रांसमिशन 49-50 हर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी पर होता है. जब भी ये फ्रीक्वेंसी उच्चतम या न्यूनतम स्तर तक पहुंच जाती है तो पावर ग्रिड फेल होने का संकट पैदा हो जाता है. ऐसी स्थिति में ट्रांसमिशन लाइन पर ब्रेकडाउन हो जाता है, जिसे ग्रिड फेल होना कहते हैं. इससे सप्लाई ठप हो जाती है. जिन स्टेशनों से बिजली की सप्लाई की जाती है वहां से फ्रीक्वेंसी का ध्यान रखना पड़ता है. इन स्टेशनों को 48.5 से 50.2 हर्ट्ज के बीच फ्रीक्वेंसी रखनी होती है. नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर इसके लिए राज्यों पर नजर रखता है. कई बार राज्य लिमिट से ज्यादा पावर की सप्लाई कर देते हैं जिससे ग्रिड फेल होने का संकट पैदा हो जाता है. सभी ग्रिडों का संचालन राज्यों की पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के जिम्मे है. पावर ग्रिड 95,000 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइन का संचालन करती है. एक सर्किट किलोमीटर का मतलब एक किलोमीटर बिजली ट्रांसमिशन लाइन से है.

About gaurav

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *